
श्री सूत जी बोले- शौनक! सुनो, मैं तुम्हारे सामने एक अन्य गोपनीय कथा का वर्णनकरूंगा, क्योंकि तुम शिव भक्तों में अग्रगण्य व वेदवेत्ताओं में श्रेष्ठ हो। समुद्र के निकटवर्तीप्रदेश में वाष्कल नामक गांव है, जहां वैदिक धर्म से विमुख महापापी मनुष्य रहते हैं। वे सभीदुष्ट हैं एवं उनका मन दूषित विषय भोगों में ही लगा रहता है। वे देवताओं एवं भाग्य परविश्वास नहीं करते। वे सभी कुटिल वृत्ति वाले हैं। किसानी करते हैं और विभिन्न प्रकार केअस्त्र-शस्त्र रखते हैं। वे व्यभिचारी हैं। वे इस बात से पूर्णतः अनजान हैं कि ज्ञान, वैराग्य तथासद्धर्म ही मनुष्य के लिए परम पुरुषार्थ हैं। वे सभी पशुबुद्धि हैं। अन्य समुदाय के लोग भीउन्हीं की तरह बुरे विचार रखने वाले, धमर्म से विमुख हैं। वे नित्य कुकर्म में लगे रहते हैं एवंसदा विषयभोगों में डूरबे रहते हैं। वहां की स्त्रियां भी बुरे स्वभाव की, स्वेच्छाचारिणी, पाप मेंडूरबी, कुटिल सोच वाली और व्यभिचारिणी हैं। वे सभी सद्व्यवहार तथा सदाचार से सर्वथाशून्य हैं। वहां सिर्फ दुष्टों का निवास है।
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